Difference Between SSL and TLS in Hindi

आज के इस पोस्ट में हम Difference Between SSL and TLS in Hindi में जानेंगे की SSL और TLS Protocol के बीच में क्या अंतर होता हैं?

Difference Between SSL and TLS in HindiDifference Between SSL and TLS in Hindi

Secure Socket Layer  (SSL) और Transport Layer Security (TLS)  दोनों प्रोटोकॉल वेब सर्वर और वेब ब्राउजर के बीच सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

अगर SSL और TLS के बीच के मुख्य अंतर की बात की जाये तो यह है की SSL Certificate वेबसाइट की सिक्योरिटी का एक हिस्सा है। जब भी कोई विजिटर SSL सर्टिफिकेट Enabled किसी वेबसाइट पर जाता है तो साइट का SSL सर्टिफिकेट उपयोगकर्ता द्वारा दर्ज किये गए गोपनीय डेटा जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर या पासवर्ड को एन्क्रिप्ट करता है।

दूसरी और TLS प्रोटोकॉल SSL का ही अपडेटेड Version है है जिसमें SSL प्रोटोकॉल के सभी फीचर शामिल हैं इसके अतिरिक्त इसमें और भी बहुत security features भी हैं।

इसके आलावा भी SSL और TLS के बीच और भी कुछ महत्वपूर्ण अंतर है जिनको हम Difference Table के माध्यम से नीचे जानेंगे लेकिन उससे पहले हम SSL और TLS के  बारे में और अच्छे से जान लेते है।

What is SSL Protocol in Hindi-SSL Protocol किसे कहते है?

SSL जिसका पूरा नाम Secure Socket Layer होता है यह प्रोटोकॉल एक इंटरनेट प्रोटोकॉल है जो वेब ब्राउजर और वेब सर्वर के बीच इनफार्मेशन के सुरक्षित आदान-प्रदान को सुनिश्चित करता है। यह यूजर द्वारा दर्ज की गयी उसकी पर्सनल इनफार्मेशन को Encrypt करके उसको सिक्योर करता है।

एक SSL सर्टिफिकेट दो तरह की Security Service प्रदान करता है Authentication और confidentiality तार्किक रूप से, यह वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच एक सुरक्षित कनेक्शन प्रदान करता है।

Netscape Corporation ने 1994 में SSL सर्टिफिकेट को विकसित किया। तब से SSL दुनिया का सबसे लोकप्रिय Web security mechanism बन गया है और यह सभी महत्वपूर्ण वेब ब्राउज़र को सपोर्ट करता हैं। वर्तमान में SSL तीन 2,3 और 3.1 Version  में उपलब्ध है।

SSL सर्टिफिकेट को TCP/IP  प्रोटोकॉल सूट में एक पूरक के रूप में माना जा सकता है। SSL प्रोटोकॉल एप्लीकेशन लेयर और ट्रांसपोर्ट लेयर के बीच में काम करता है।

सबसे पहले SSL Layer पर एप्लिकेशन लेयर से डेटा पास किया जाता है। फिर, SSL Layer  एप्लिकेशन लेयर से प्राप्त डेटा पर एन्क्रिप्शन करता है और एन्क्रिप्टेड डेटा के रूप में SSL header (SH)  नामक अपना स्वयं का Encryption information Header भी जोड़ता है।

जब यह Encrypted Data रिसीवर के पास जाता है  SSL Layer  सबसे पहले  SSL header (SH) को हटा कर एन्क्रिप्ट किए गए डेटा को डिक्रिप्ट करती है और  ओरिजिनल डाटा को कंप्यूटर की एप्लिकेशन लेयर को वापस करती है।

How SSL works in Hindi-SSL प्रोटोकॉल कैसे काम करता है।

SSL प्रोटोकॉल के 3 Sub-Protocol होते है जो मिलकर काम करते है जिनके बारे में नीचे बताया गया है।

  1. Handshake protocols: यह वास्तव में चार चरणों से बना है।
    • Establish security capabilities
    • Server authentication and key exchange
    • Client authentication and key exchange
    • Finish
  2. Record protocol:SSL में रिकॉर्ड प्रोटोकॉल क्लाइंट और सर्वर के बीच हैंडशेक के सफल समापन के बाद ही दिखाई देता है। प्रोटोकॉल एसएसएल कनेक्शन के लिए दो परिभाषित सेवाएं प्रदान करता है जो इस प्रकार हैं।
    • Confidentiality
    • Integrity
  3. Alert protocol:यदि क्लाइंट या सर्वर द्वारा किसी Error की पहचान की जाती है, तो पहचान करने वाला पक्ष किसी अन्य पार्टी को अलर्ट संदेश भेजता है।

What is TLS Protocol in Hindi-TLS Protocol किसे कहते है?

TLS यानि की Transport Layer Security एक cryptographic protocol है जो कंप्यूटर नेटवर्क पर कम्युनिकेशन सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया हैं। आज के समय  TLS  प्रोटोकॉल वेब ब्राउजिंग, ईमेल, इंस्टेंट मैसेजिंग और वॉयस ओवर आईपी जैसे Application में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा।

ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी, या TLS  प्रोटोकॉल इंटरनेट पर Communication के लिए प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा की सुविधा के लिए व्यापक रूप से अपनाया गया सिक्योरिटी प्रोटोकॉल है। TLS Protocol का  मुख्य उपयोग Web Browser और वेब सर्वरों के बीच कम्युनिकेशन को एन्क्रिप्ट करना है।

ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी, या TLS  प्रोटोकॉल को इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (IETF) द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जो एक अंतरराष्ट्रीय मानक संगठन है, और इस प्रोटोकॉल का पहला Version 1999 में  Published हुआ था। TLS  का सबसे लेटेस्ट Version 1.3  है जो 2018 में प्रकाशित हुआ था।

TLS और SSL दोनों ही प्रोटोकॉल एक जैसे ही काम करते है और इसीलिए TLS को व्यापक रूप से SSL के रूप में पहचाना जाता है सिर्फ इसलिए क्योकि यह एक अधिक उपयोग किया जाने वाला शब्द है, लेकिन वास्तव में जब भी कोई SSL सर्टिफिकेट खरीदता है, तो वे ECC, RSA or DSA encryption के विकल्प के साथ latest TLS certificates खरीद रहे हैं।

Difference Between SSL and TLS in Hindi

अभी तक ऊपर हमने जाना की SSL और TLS Protocol किसे कहते है? अगर आपने ऊपर दी गयी सारी बाते ध्यान से पढ़ी है तो आपको SSL और TLS Protocol के बीच क्या अंतर है इसके बारे में पता चल गया होगा ।

अगर आपको अब भी SSL और TLS Protocol में कोई confusion है तो अब हम आपको इनके बीच के कुछ महत्वपूर्ण अंतर नीचे बताने जा रहे है।

S.NO SSL TLS
1. SSL का फुलफॉर्म Secure Socket Layer  होता है। TLS का फुलफॉर्म Transport Layer Security होता है।
2. SSL Fortezza algorithm को supports करता है। TLS Fortezza algorithm को सपोर्ट नहीं करता है।
3. SSL  (सिक्योर सॉकेट लेयर) 3.0 वर्जन है। TLS 1.0 version है
4. SSL में Message digest का उपयोग Master Secret बनाने के लिए किया जाता है। TLS में Master Secret बनाने के लिए Pseudo Random Function का उपयोग किया जाता है।
5. SSL में Message Authentication Code protocol का उपयोग किया जाता है। TLS में Hashed Message Authentication कोड प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है।
6. SSL TLS से Complex होता है। TLS प्रोटोकॉल सिंपल होता है।
7. TLS की तुलना में SSL कम सिक्योर होता है। TLS उच्च सुरक्षा प्रदान करता है।

Conclusion

इस पोस्ट में हमने Difference Between SSL and TLS in Hindi की SSL और TLS Protocol के बीच में क्या अंतर होता हैं इसके बारे में जाना और साथ में SSL और TLS Protocol क्या होता है इसको भी अच्छे से जाना।

SSL और TLS दोनों ही Protocol सिक्योरिटी के उद्देश्य से ही काम करते हैं और टीसीपी और एप्लीकेशन  के बीच आपके कनेक्शन को सुरक्षा और एन्क्रिप्शन प्रदान करते हैं।

सबसे पहले SSL version 3.0 को बनाया गया और उसके बाद TLS version 1.0 को जो कि SSL  का नवीनतम Version है जिसमें SSL प्रोटोकॉल के सभी फीचर शामिल हैं इसके अतिरिक्त इसमें और भी बहुत security features भी हैं।

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