भारत ने आज अंतरिक्ष में कौनसी लाइव सैटेलाइट को मार गिराया है और क्यों?

जैसा प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आज भारत के लिऐ बड़ा ही ऐतिहासिक दिन है,kक्योंकि हमने बड़ा जटिल आपरेशन कर दिखाया है और ऐसा करने वाला भारत विश्व का चौथा देश बन चुका है। ये आपरेशन इतना जटिल होता है कि आज तक यूरोपियन स्पेस एजेन्सी भी ये तकनिक विकसीत नहीं कर पाई है।

अब आप को साधारण भाषा में बताता हूँ कि आज हुआ क्या है और क्यों ये इतना महत्वपूर्ण है?

आज भारत ने अपनी ऐ-सैट मिसाईल से एक लाईव सैटेलाईट मार गिराया जो 300 किलोमीटर कि लो अर्थ ओरबीट में मौजूद था।पहले उन वैज्ञानिक शब्दों का अर्थ समझ लेते हैं जिसका हमने अभी ऊपर उपयोग किया है।

ऐ-सैट मिसाइल: ये एक उपग्रह रोधी मिसाइल होती है जिसे जमीन,आसमान या जल से छोडा जा सकता है।इसका मुख्य उद्देश्य दुशमन के उपग्रह को नष्ट करना होता है ताकि उपग्रह से मिलने वाला लाभ दुश्मन न ले पाये और रणनीतिक रूप से युध्द में पिछड़ जाये।

लाईव सैटेलाईट: इसका शाब्दिक अर्थ होता है जिन्दा उपग्रह अर्थात् ऐसा उपग्रह जो ठीक प्रकार से अपना कार्य कर रहा हो और उसने अभी अपनी आयु पूरी ना की हो, जैसे कि अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन अभी एक लाईव सैटेलाईट है।

लो अर्थ ओरबीट: इसका अर्थ उन कक्षाओं से हैं जो धरती कि सतह से 2,000 किलोमीटर कि ऊचाई पर होती है

अब आज क्या हुआ इस पर आते हैं

आज मोदी जी ने घोषणा कि की वे 12 बजे राष्ट्र को सम्बोधित करेगें,सभी लोग शायद असमंजस में थे कि क्या होने वाला है?

मोदी जी ने बताया कि आज हमारे डीआरडिओ के वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई ए-सैट मिसाईल का पहला सफल परीक्षण किया गाया जिसमें हमने एक लाईव उपग्रह को नष्ट कर दिया,सरल शब्दो में कहूँ तो आज ए-सैट मिसाईल का परीक्षण हुआ जिसमें उसने अपने लक्ष्य को सफलता पूर्वक भेड़ दिया।

इसका अर्थ ये हुआ कि आज से भारत के पास वो सक्षमता आ चुकी है जिसमे में अन्तरिक्ष में मौजूद दुश्मन के जासूसी उपग्रह अथवा जरूरत पडने पर अन्य उपग्रहों को मार कर गिरा सकता है।

ऐसे क्षमता रूस ने भी 2015 में ही प्राप्त की है आप अन्दाजा लगा सकते है कि यह तकनीक कितनी नई है जिसको हमारे वैज्ञानिको ने हासिल किया है।

ये महत्वपुर्ण क्यों हैं: जब भारत ने पोखरण में परमाणु परिक्षण किया था तो अमेरिकी उपग्रह भारत पर लगातार नजर बनाये हुये थे।थोड़ी बहुत हलचल को भी वे भाँप रहे थे।हमारे लिऐ ऐसी स्थिति में यह कर पाना बहुत मुशकिल था लेकिन भारत ने सफलता पूर्वक पोरखण परीक्षण किया अगर तब भारत के पास यह तकनीक होती तो अमेरिका के जासूसी उपग्रह भारत के आसमान पर नजर भी ना डाल पाते।

अगर भविष्य में अभी युध्द हुआ अथवा भारत कोई देशहित में ऐसी परियोजना चलाए,जिसे गुप्त रखना अनिवार्य हो तो अब भारत बिना किसी उपग्रह द्वारा की जाने वाली जासूसी से डरे अपने मिशन को पूरा कर सकता है क्योंकि भारत की स्पेस सीमा में घुसने का अर्थ होगा उस उपग्रह का अन्त।

ये इतना मुशिकल क्यों है: अन्तरिक्ष में कोई भी धमाका करना अथवा दो चीज़ों का टकराना एक बेहद ही भयानक और बहुत बडा नुकसान पहुचाने वाली घटना हो सकती है। अन्तरिक्ष में उपग्रह बडी तेज गति के साथ घूमते हैं। जिस उपग्रह को आज हमने उड़ाया वो टक्कर के समय लगभग 27,752 किलोमीटर प्रति घण्टे कि रफ्तार पर होगा (धरती के सापेक्ष)।अगर कोई भी चूक होती तो इस टक्कर से पैदा होने वाला कचरा इतनी तेजी से स्पेस में फैलता कि उस कक्षा में मौजुद सारे सैटेलाईट नष्ट हो जाते। अगर आपने ग्रेवीटी मुवी देखी हो तो आप समझ सकते हैं कि ये छोटी सी चुक मानव सभ्यता को कितना पीछे धकेल सकती थी

मिसाईल स्वयं 27,000 किलोमीटर प्रति घण्टे कि गति पर थी और कक्षा में मौजुद उपग्रह भी लगभग इस गति पर ही था ये एक गोली से दुसरी गोली को उडा देने से भी अधिक मुश्किल काम था यें

इस मिशन शक्ति को पूरा करने के लिऐ हर गणना को अचूक रखा गया होगा.

भारतवासी होने के नाते इस महान अवसर की आप सभी को बधाई हो. जय हिन्द।

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